हम में से अधिकतर लोगों के साथ यही समस्या है | जेब में नब्बे रूपये हैं, तो उसका फायदा नहीं उठाएंगे | बस इसी प्रयास में लगे रहेंगे कि दस रूपये और मिल जाँय और पूरे सौ हो जाए | नब्बे रूपये का सुख नहीं भोगेंगे | दस रूपये का दुःख भोगेंगे | हम कभी अपने से छोटों को देखकर नहीं जीते हैं | हम सभी कम्पटीशन में जी रहें हैं, इसीलिए दुखी हैं | अगर पडौसी के घर में कार हो और हमारे घर में नहीं तो यह हमारे लिए सीधी चुनौती हो जाती है | इसलिए, जीवन में इतने दुःख , इतना संघर्ष और इतनी पीडाएं हैं | क्योंकि जीवन में केवल वही सुखी है जो दुःख में भी सुख खोजकर जीना जानता है|
एक बार की बात है - एक महात्मा के पास एक आदमी और उसकी पत्नी पहुंचे | बड़े परेशान, से और बुझे -बुझे से लग रहे थे | महात्मा जी ने उनसे उनकी परेशानी का कारण पुछा तो वे बोले मैं बहुत परेशान हूँ | मुझे बिजनेस में एक लाख का घाटा हुआ है | मन बड़ा बैचैन हो गया है | उसके पीछे उसकी पत्नी बैठी थी | वह धीरे से, मुस्करायी और बोली महाराज मेरे पति झूठ बोल रहे हैं | इनकी बातों में मत आना, इन्हें कोई घाटा नही हुआ | महात्मा ने कहा आखिर सच्चाई क्या है | तुम कहते हो घाटा , पत्नी कहती है कोई घाटा नही , सही क्या है ? वह आदमी बोला , मेरी पत्नी नही समझती , मुझे पूरे एक लाख का नुक्सान हुआ है | उसकी पत्नी बोली ये तो झूठ है एकदम सफेद झूठ | महात्मा ने उसकी पत्नी से कहा सच कहो आखिर बात क्या है ? उसकी पत्नी बोली दरअसल बात यह है कि इन्होने जो, सौदा किया था , उसमे इन्हें इनके गणित के हिसाब से दो लाख का फायदा होना चाहिए था , लेकिन इन्हें एक लाख का ही फायदा हुआ है | इसलिए दुखीं हैं | पत्नी सुखी है क्योंकि वह एक लाख के फायदे को देख रही है | पत्नी ने दुःख में से, सुख को खोज लिया है | पति दुखी है क्योंकि वह जो खो गया है , उसमे ही जी रहा है | जो मिल गया है उसके महत्त्व को नही समझ रहा है | जो मिला है उसका आनंद नही उठा रहा है | बल्कि जो नही मिला है उसका दुःख उठा रहा है | महात्मा, ने उससे कहा दुनिया की कोई चीज तुम्हे सुखी नही कर सकती क्योंकि तुम अपने लिए नही जी रहे, तुम दुनिया को दिखने के लिए जी रहे हो | दुनिया के लिए जीने वाला कभी सुखी नही रह सकता | इसलिए तुम बिना कारण ही दुखी हो, मई तो क्या कोई भी तुम्हारी इस समस्या का हल नही बता सकता , जब तक तुम नही चाहते तुम्हे कोई भी सुख सुखी नही कर सकता |
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