Wednesday, February 17, 2010

" बिनु सत्संग विवेक न होई "

रामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास ने कलियुग में भवभाधाओं से छुटकारा पाने के लिए बहुत ही सरल उपाय बताया है और वह है -- नाम - जाप | उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा --

" कलियुग केवल नाम आधारा , सुमिर - सुमिर नर उतरहिं पारा | "

चूंकि इस युग में मनुष्य झंझटों में इस प्रकार फँस गया है कि उसके लिए तप , हवन , साधना ,ध्यान व् अन्य कठोर उपायों का निर्वाह करना मुश्किल हो गया है | अतः जब भी , जहां भी , जिस भी अवस्था में आप प्रभु का सुमिरन (जाप ) कर लें तो दीनबंधु - दीनानाथ , करुनानिधान - स्वामी अपने भक्तों की प्रार्थना पर अवश्य ही ध्यान देते हैं | नाम - जाप भी यदि सत्संग के माध्यम से किया जाय तो मन लगता है | क्योंकि मन चंचल है , क्षण में इधर तो क्षण में उधर | इसकी प्रकृति ही कुछ विचित्र है | यह मोह - माया में उलझते देर नही लगाता | मनुष्य को इस कदर भरमा देता है कि वह क्या करे और क्या नही करे की स्थति में पहुँच जाता है |

एक बार भगवान् श्री कृष्ण के परम मित्र उद्धव ने भी मोह - माया से छुटकारा पाने के लिए प्रभु से अनुनय - विनय की थी | जिस समय उद्धव सखियों के प्रेम के आगे पराजित होकर प्रभु..... Click here for remaining part

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